अप्पू सात वर्ष का है। उसे पेड़ों पर चढ़ना, अपनी बहन के साथ खेलना और अपनी उम्र के और बच्चों की तरह ही मिठाई खाना बेहद अच्छा लगता है। मगर अप्पू के चेहरे पर मुस्कुराहट कम ही आती है। वह मनुष्यों में पायी जाने वाली एक अत्यंत सामान्य विकृति से पीड़ित है – फटा हुआ होंठ तथा तालू। केवल एक घंटे का ऑपरेशन यह सब बदल सकता है!
भारत में, प्रति वर्ष, अप्पू की तरह, लगभग 35,000 बच्चे, फटे हुये होंठ और तालू (क्लेफ़्ट लिप) के साथ पैदा होते हैं। फटा हुआ होंठ बच्चों में होने वाली एक सामान्य और चिकित्सा योग्य विकृति है। दुर्भाग्य से, विकासशील देशों में अधिकांश फटे हुये होंठ बिना ठीक किए ही छोड़ दिये जाते हैं। परंतु क्या यह होंठ का फटा होना मात्र एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है? नहीं। ऐसे बच्चों को, जिनका इलाज नहीं होता है, जीवन में शायद ही कोई अवसर मिल पाता है। यहाँ तक कि माता का दूध पी पाना भी उनके लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होता है। विशेषकर, जिन बच्चों के तालू फटे हुये होते हैं, उनमें तो कुपोषण की संभावना बहुत ही बढ़ जाती है, तथा ऐसे दस बच्चों में से एक तो अपने पहले जन्मदिन के पहले ही जीवन गंवा देता है।
फटे हुये होंठ वाले बच्चों को अक्सर परेशान किया जाता है, चिढ़ाया जाता है और इसके कारण वे अपमानित होते हैं, और वे अपनी ही नज़रों में गिर जाते हैं। वसंती की कहानी (जो विडियो में दिखाई गई है), फटे हुये होंठ और तालू वाले ऐसे अधिकांश लोगों को मिलने वाली इसी चुनौती का चित्रण करती है। उसके शब्दों में, वह उसके जीवन का सबसे कठिन समय था। उसका कहना था, “लोग जिस तरह मेरे ओर देखते थे, वह बहुत ही पीड़ादायी था। मैं तो बाहर जाना ही नहीं चाहती थी।“
उसका सपना था,एयर होस्टेस बनने का,और वह सच हुआABMSSकी सहायता से!
अखिल भारतीय महिला सेवा समाज (ABMSS) एक ऐसी लाभ निरपेक्ष संस्था है, जो गरीब परिवारों के फटे होंठों वाले बच्चों की सर्जरी में सहायता करती है। भारतवर्ष में फैले हुये 14 क्लेफ़्ट केन्द्रों पर हम अभिप्रेरित सर्जनों, एनेस्थीसियोलोजिस्टों, ओर्थोडोंटिस्टों तथा स्पीच थिरेपिस्टों के साथ मिल जुल कर काम करते हैं। हमारा प्रयास फटे होंठों वाले बच्चों के सम्पूर्ण अंतर्विषयक इलाज के सिद्धांत को प्रोत्साहित करना है। रोगियों को दी जाने वाली इस सेवा के अतिरिक्त, हमारी संस्था, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता पैदा करने तथा इस धर्मार्थ कार्य में सहायता देने वाले डॉक्टरों तथा अन्य चिकित्साकर्मियों की शिक्षा में भी सहायता करती है। हमारे धर्मार्थ दानकर्ताओं की मदद से हम प्रति वर्ष लगभग 2000 रोगियों का इलाज कर पाते हैं। ABMSS, ड्यूश क्लेफ़्ट किंडरहिल्फ़ ई वी की भारतीय एफ़िलिएट है।
उदाहरण के लिए अब आपके1000रुपये के योगदान का मूल्य 2000 रुपये होगा!
मूल्य एवं विभाजन
सर्जन – 3,500 रुपये
एनेस्थीटिस्ट – 2,000 रुपये
अस्पताल – 5,500 रुपये
रोगी की खोज तथा अन्य कार्य – 1,000 रुपये
इलाज के बाद की देखभाल – 1,000 रुपये
कुल - 13,000 रुपये
*इनके अलावा लगभग 500 रुपये प्रशासनिक ख़र्चों में लगते हैं।
हमारा उद्देश्य 30 लाख रुपये एकत्र करने का है जिसकी सहायता से हम होंठों की विकृतियों वाले 200 बच्चों की सर्जरी करा सकें। हमारा उद्देश्य इस जन्मजात सामान्य विकृति का इलाज कराना है, जिसे वहन करने की क्षमता इन बच्चों के परिवारों की नहीं है।
फटे हुये होंठों की विकृति वाले बच्चे की सर्जरी के लिए केवल 13,500 रुपये उपलब्ध कराना; इसका अर्थ है, बच्चे के जीवन को पूरी तरह बदलना, तथा उसे एक बेहतर भविष्य देना।
आप सर्जरी के लिए कम से कम 100 रुपये का आंशिक योगदान दे सकते हैं, या सर्जरी का पूरा ख़र्च उठा सकते हैं।
हमारे अभियान में भागीदारी करिये: योगदान करिए, अपने मित्रों तथा परिवार में हमारा संदेश फैलाइए। सोशल मीडिया शेयर की सहायता से उन्हें बताइये ताकि वे आपके अच्छे कार्य के बारे में जान सकें तथा हमारे उद्देश्य भी उन तक पहुँच सकें।
हमारी टीम इस क्राउडफ़ंडिंग अभियान के पेज पर आपके योगदान की सहायता से प्राप्त होने वाले प्रत्येक माइलस्टोन, को पोस्ट करेगी तथा इसे उन सभी के साथ साझा किया जाएगा जिन्होंने कृपा करके योगदान किया है। वे लोग, जो एक पूरी सर्जरी के लिए योगदान करेंगे, उन्हें रोगी तथा सर्जरी के समस्त विवरण के साथ लाभार्थी-रिपोर्ट ईमेल द्वारा प्राप्त होगी। आपका फ़ीडबॅक पाकर हमें बहुत प्रसन्नता होगी।
Thank you so much for your wonderful support, further details are coming up soon.
Thank you so much for your wonderful support, further details are coming up soon.
The start has been done and the first percentage has been raised. Two children can be operated from that money. But we think bigger... Help us push the campaign and make 200 kids smile!!
Having seen our video, read about air hostess Vasanthi in the Bangalore Mirror!
http://www.bangaloremirror.com/columns/you/Bringing-her-smile-back/articleshow/50892026.cms
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